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जुलाई, 2021

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_____________________________________________ इस अंक में:- ▪️ संपादकीय ▪️ आँखें (कविता) ▪️ जिंदगी बहुत जी ली किताबें साथ में रखकर (ग़ज़ल) ▪️ In the direction of dilemma... ▪️ लब्ज़ों के सहारे जीने की खुशी क्या है (कविता) ▪️ लाख़ ढूढ़ने पर भी ख़ुद को ख़ुद सा नही मिलता (ग़ज़ल) ▪️ A New Remedy! ▪️ बात ज़ुबाँ पर कैसे लाएँ, हमको तुमसे प्यार हुआ है (गीत)  ▪️ क्या बतायें हम तुम्हें किसके 'सहारे' साथ हैं (ग़ज़ल) ▪️ इंसानियत ____________________________________________________ 🗒️ संपादकीय  इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक के अंतिम वर्ष 2020 की शुरुआत हो चुकी थी। सभी अपने-अपने तरीके से नववर्ष का स्वागत कर रहे थे। सेमेस्टर परीक्षा के पश्चात् होने वाली छुट्टियों को बिता छात्र छात्रावास को लौटने लगे लेकिन उन्हें क्या पता था कि सब के हाथ निराशा लगने वाली है। अपने पड़ोसी मुल्क चीन से ये खबर आई कि वहां के वुहान प्रदेश में एक वायरस का प्रकोप बदस्तूर जारी है, जिसे कोविड-19 नाम दिया गया। अचानक 30 जनवरी को भारत में कोविड-19 का पहला केस मिला और देखते ही देखते केस की तादाद में इजाफा होने लगा। इसी बीच मार्च म...

AAYAM AUGUST EDITION

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                         AAYAM                       Blog page of A.N.D. HOSTEL,FSS,B.H.U.                              AUGUST 2019    

मातृभाषा हिंदी

भाषा के द्वारा मनुष्य अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है। जन्म लेने के बाद मानव् जो प्रथम भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहते हैं। मातृभाषा, किसी भी व्यक्ति की सामाजिक एवं भाषाई पहचान होती है। मातृभाषा सीखने, समझने एवं ज्ञान की प्राप्ति में सरल है। ‌मेरी मातृभाषा हिंदी मात्र एक संपर्क साध्य नहीं, वरन मातृतुल्य है। यह अभिव्यक्ति है उस पहले शब्द की जिससे मैंने अपनी जन्मदात्री को सम्बोधित किया था। पिता से पहली बार कुछ कहने का प्रयास और दादी के प्यार भरे शब्दों की मिठास है इसमें। प्यार है उन कहानियों का जो माँ ने अपनी गोदी मैं सुलाकर सुनाई थी। वो मिठास है जो मिठाइयों के नाम सुनते ही अंत:करण मैं घुल जाती थी। साईकिल सीखते समय गिरने, उठ जाने, रोने और सीख जाने के मध्य जो संवाद हुए वो सब दर्ज हैं इसमें। स्कूल जाते समय का डर, और असेंबली में पहली पहली बार खड़े होकर सुने गए वो अजीब से शब्द जिनमें से शायद ही कुछ समझ आया हो। कक्षा की वो डाँट, दोस्त बनने की प्रक्रिया, वह पहली पहली लड़ाई, शरारतें, गुस्सा, नाराज़गी सब का माध्यम माध्यम का माध्यम माध्यम हिंदी तो थी। शिक्षा तो मात्र बहाना था था। ...

वज्रपात

मैं मृत्यु का बन के चारण अब सबको सत्य बताऊँगा मैं रौद्र रूप कर के धारण अब समर कराने आऊँगा अश्रुकण को मैं भांप बना अब घोर घात करने आया वरदान कहीं अभिशाप बना मैं वज्रपात करने आया क्यों मेरी कविता मौन रहे शब्दों से युद्ध करूँगा अब क्यों रौद्र भावना गौण रहे अश्कों को क्रुद्ध करूँगा अब मैं सूरज प्राची को दिलवा रश्मि से बात करूँगा अब गाण्डीव सव्यसाची को दिलवा तिमिर के साथ लड़ूँगा अब वो लहू बहाते सीमा पर कुछ घर में बैठे हंसते हैं वीरों को मौत नहीं आती वो अमरत्व में बसते हैं एक बेटा माँ का मरता है है आँचल सुना हो जाता पछताता भाग्य पर हूँ अपने उस माँ का बेटा हो पाता ! कर्मठ यौवन सीमा पर है रक्तिम सावन सीमा पर है एक राम दिखाई पड़ता है सहस्त्र रावण सीमा पर हैं सीने पर उसके है भारी शत स्वप्नों का बाजार लगा अरमानों की भीड़ लगी वो करने सब साकार चला उनके कर्तव्यों पर लेकिन   आवाज उठाते हैं कायर बन...